नई दिल्ली. 24 सितंबर 2007 को जोहानिसबर्ग के वॉन्डरर्स स्टेडियम में भारत और पाकिस्तान के पहले टी20 वर्ल्ड कप का फाइनल मुकाबला खेला गया. आखिरी ओवर में पाकिस्तान को जीत के लिए 13 रन चाहिए थे. पाकिस्तान के कप्तान मिस्बाह उल हक और मोहम्मद आसिफ क्रीज पर थे. भारत के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने करोड़ों क्रिकेट फैंस को हैरानी में डाल दिया. धोनी ने गेंद हरभजन सिंह की जगह जोगिंदर शर्मा के हाथ में थमा दी.

मध्यम गति के गेंदबाज जोगिंदर शर्मा ने साल 2004 में भारत के लिए वनडे डेब्यू किया था. उन्होंने अपना आखिरी और चौथा वनडे मुकाबला जनवरी 2007 में खेला. टीम इंडिया में उन्हें ज्यादा मौके नहीं मिले. हालांकि, घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन कर उन्होंने अचानक वर्ल्ड कप का टिकट कटा लिया. वर्ल्ड कप के शुरुआती मुकाबलों में उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला. हालांकि, धोनी ने इस तुरुप के इक्के को बड़े मुकाबलों के लिए बचाकर रखा था.

पाकिस्तान के कप्तान मिस्बाह उस समय शानदार फॉर्म में चल रहे थे. उन्होंने हरभजन सिंह को तीन छक्के लगाकर पाकिस्तान को वर्ल्ड कप जिताने का अपना इरादा जाहिर कर दिया. आखिरी ओवर में धोनी ने गेंद जोगिंदर शर्मा को थमाई. पहली गेंद ही दबाव में शर्मा ने वाइड फेंक दी. अगली गेंद पर कोई रन नहीं बना. अब पाकिस्तान को जीत के लिए 5 गेंद में 12 रन चाहिए थे. दूसरी गेंद पर मिस्बाह ने लंबा छक्का जड़ दिया. ऐसा लगा मानो मैच भारत के हाथ से फिसल गया.

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अब पाकिस्तान को जीत के लिए 4 गेंद में सिर्फ 6 रन की जरूरत थी. जोगिंदर शर्मा ने तीसरी गेंद फुल लेंथ पर डाली और मिस्बाह ने स्कूप शॉट खेला. गेंद सीधे शॉर्ट फाइन लेग पर मौजूद फील्डर एस श्रीसंत के हाथों में चली गई. भारत ने वर्ल्ड कप 5 रन से जीत लिया.

15 साल बाद भी इस बात पर चर्चा होती है कि धोनी ने हरभजन सिंह के ऊपर जोगिंदर को क्यों तरजीह दी. उस समय भारत के कोच लालचंद राजपूत ने इस बात का खुलासा हाल में ही किया है. न्यूज 18 हिन्दी के स्पोर्ट्स एडिटर विजय प्रभात ने जब इस मसले पर राजपूत ने पूछा तो उन्होंने कहा, “जोगिंदर घरेलू क्रिकेट में बहुत अच्छी यॉर्कर डालते थे. वह बिना प्रेशर के गेंदबाजी करते थे. उन्हें देखकर लगता नहीं था कि वह पहला ओवर डाल रहे हैं या आखिरी. कप्तान धोनी भी जोगिंदर की गेंदबाजी से बहुत प्रभावित थे.”

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लालचंद राजपूत ने कहा कि धोनी ने उनसे शर्मा के बारे में कहा था कि ज्यादा से ज्यादा छह छक्के खाएगा. लेकिन हमें इसे मौका देना चाहिए. इसके अलावा धोनी ने जोगिंदर से भी कहा, “कोई दिक्कत नहीं है. आप अपने हिसाब से गेंदबाजी करें. जैसे आप घरेलू क्रिकेट में यॉर्कर डालते हैं, वैसे ही यहां भी डालें.” लालचंद राजपूत कहते हैं, युवा खिलाड़ियों को अपने कप्तान की बातों से आत्मविश्वास जगता है.

फाइनल मुकाबले से जोगिंदर शर्मा को सिर्फ तीन टी20 इंटरनेशनल मैच खेलने का अनुभव था. उन्होंने सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के डेथ ओवरों में शानदार गेंदबाजी करते हुए दो विकेट भी झटके थे. लालचंद राजपूत भारतीय गेंदबाज को आखिरी ओवर देने के बारे में एक और बताते हैं. उन्होंने कहा, “प्रैक्टिस सेशन में सभी गेंदबाजों से डेथ ओवर गेंदबाजी की प्रैक्टिस कराई जाती है. जोगिंदर को बिना डरे नेट पर अच्छी बॉलिंग कर रहे थे.”

उनके बारे में धोनी ने लालचंद राजपूत से कहा था कि सर इसको कोई इंटरनेशनल क्रिकेट में नहीं जानता है. जोगिंदर का कोई वीडियो एनालिसिस भी नहीं है. जब तक बल्लेबाज इसे समझेगा, वह छह गेंद डाल चुका होगा.

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