नई दिल्ली. सरफराज खान (Sarfaraz Khan) का बल्ला फर्स्ट क्लास क्रिकेट में पिछली 14 पारियों से रन उगल रहा है. वे मुंबई की ओर से 150 से भी अधिक की औसत से रन बना रहे हैं. लेकिन इस 24 साल के युवा बल्लेबाज को यहां तक पहुंचने के लिए उप्र तक जाना पड़ा था. उनका बचपन मुंबई में बीता. लेकिन 2015-16 रणजी सीजन से पहले उनके पिता नौशाद खान ने उत्तर प्रदेश जाने का फैसला किया. उस समय वे 18 साल के थे. उनकी आंखों में आंसू थे, लेकिन वे इस फैसले को रोक नहीं सके. उन्होंने अंडर-14, अंडर-16 के अलावा अपना फर्स्ट क्लास डेब्यू भी मुंबई की ओर से किया था. ऐसे में इस शहर से जाने का उनका मन ही नहीं था. लेकिन इसके बाद वे फिर मुंबई लौटे और खोए हुए फॉर्म को हासिल करने के लिए रोजाना 600 से 700 गेंद खेलते हुए बड़ा मुकाम हासिल किया.

क्रिकइंफो से बात करते हुए उन्होंने कहा, “जब मैं यूपी जाने के लिए यह तैयारी कर रहा था, तब मुझे नहीं पता कि हमने यूपी जाने का फैसला क्यों किया. तो मैं एक बात सोच रहा था कि अंडर-19 के दौरान में हमें कुछ बड़े खिलाड़ियों के वीडियो दिखाए गए थे, जो मुंबई रणजी के टी-शर्ट में थे. वे या तो शतक मार रहे या ट्रॉफी उठा रहे थे.’ उन्होंने कहा कि मेरा सपना था कि मैं मुंबई की रणजी की जर्सी में शतकीय पारी खेलूं.

उप्र की तरह से अच्छी शुरुआत

सरफराज खान ने उप्र की ओर से डेब्यू मैच में मप्र के खिलाफ 155 रन बनाए. लेकिन वे इस सीजन में सिर्फ 3 ही मैच खेल सके, क्योंकि वे अंडर-19 भारतीय टीम का हिस्सा थे. 2016 की शुरुआत में वर्ल्ड कप होना था. इस सीजन में उप्र की टीम नॉकआउट में नहीं पहुंच सकी. दूसरी ओर मुंबई ने 41वीं बार ट्रॉफी पर कब्जा किया. अगले सीजन में वे उप्र की ओर से 8 में से सिर्फ 5 मुकाबले खेल सके और उनका औसत 30 से कम का रहा.

अब मेरे को नहीं खेलना इधर

सरफराज खान ने कहा कि इसके बाद मैंने अपने पिता से कहा दिया कि अब मेरे को नहीं खेलना इधर-उधर से. अब खेलूंगा, तो सिर्फ मुंबई से, नहीं तो क्रिकेट छोड़ दूंगा. लेकिन मुंबई टीम में वापसी आसान नहीं थी. बीसीसीआई के नियम के अनुसार, खिलाड़ी को एक साल के कूलिंग पीरियड में जाना होगा, तभी वह मुंबई से फिर से खेल सकेगा. 2020 की शुरुआत में उन्हें 5 साल बाद एक बार फिर से मुंबई टीम में जगह मिली. लेकिन वे पहली पारी में 20 गेंद पर 8 रन बनाकर आउट हो गए. उन्होंने कहा कि 8 रन बनाने के बाद मुझे लगा कि मैं बाहर हो जाऊंगा.

71 रन की पारी से मिला आत्मविश्वास

लेकिन, मुंबई की जब दोबारा बल्लेबाजी आई, तो पृथ्वी शॉ चोटिल हो गए थे. वहीं 4 सीनियर खिलाड़ी आदित्य तारे, अजिंक्य रहाणे, सिद्धेश लाड और सूर्यकुमार यादव 30 रन के पहले आउट हो गए. उन्होंने कहा कि मैं वहां खड़ा रहना चाहता था. उन्होंने 140 गेंद पर नाबाद 71 रन बनाए. लेकिन उनकी टीम हार गई. कर्नाटक के तेज गेंदबाजों ने सभी 9 विकेट झटके. उन्होंने बताया कि मैं कुछ समय से अपने पिता के साथ स्विंग गेंदबाजी के खिलाफ अपने खेल पर काम कर रहा था. मुझे पता था कि मैं इसे खेल सकता हूं, मुझमें आत्मविश्वास था. इसलिए मैंने विकेट पर खड़े रहने का फैसला किया. लेकिन विकेट ऐसा था कि बड़ा स्कोर करना संभव नहीं था. यह मेरी सर्वश्रेष्ठ पारियों में से एक थी. इसने मुझे काफी आत्मविश्वास दिया.

6 मैच में 928 रन बनाए

इसके बाद सरफराज खान का बल्ला रूका ही नहीं. उन्होंने नाबाद 301, नाबाद 226, 177 सहित पूरे सीजन में 155 की औसत से 928 रन बनाए. जब वे उन्होंने मुंबई में दोबारा से वापसी की है. वे सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं. वे 14 पारियों में 1600 से अधिक रन बना चुके हैं. औसत 150 का है. इस दौरान उन्होंने 184 चौके और 35 छक्के लगाए हैं. वहीं इस दौरान टीम का अन्य कोई बल्लेबाज 1150 रन भी नहीं बना सका है.

मैं अटैकिंग खिलाड़ी था

सरफराज खान ने बताया कि वे शुरुआत में अटैकिंग खिलाड़ी थे. लेकिन कई बार इस कारण उन्होंने अपना विकेट जल्द गंवा दिया. इसके बाद मैंने पिता के साथ मिलकर इस पर काम किया. उनके पिता भी कोच हैं. उन्होंने बताया मैं रोजाना 600 से 700 गेंद खेलता था. यदि टी20 का मैच हाेता, तो नेट्स पर कट और पुल खेलता. वहीं यदि फर्स्ट क्लास का मैच होता, तो अधिक से अधिक स्टंप की बाहर की गेंद पर को छोड़ने की कोशिश करता. अगर किसी अटैकिंग प्लेयर में थोड़ा धैर्य आ जाता है, तो वह और अधिक खतरनाक हो जाता है.

टिम डेविड ने 10 गेंद पर बनाए 52 रन, टी20 के मैच में बने 400 से अधिक रन, VIDEO

PAK vs WI: पाकिस्तान के उप-कप्तान भी पीछे नहीं, डाइव लगाकर पकड़ा अद्भुत कैच, VIDEO

उन्होंने कहा कि फर्स्ट क्लास क्रिकेट में आप यदि शुरुआती घंटे में टिके रह जाते हैं, तो फिर आपको रन बनाने से कोई नहीं रोक सकता. मुंबई की टीम रणजी ट्रॉफी के मौजूदा सीजन में सेमीफाइनल में पहुंच गई है. उसने क्वार्टर फाइनल में उत्तराखंड़ पर रिकॉर्ड 725 रन से बड़ी जीत दर्ज की. यह फर्स्ट क्लास क्रिकेट के इतिहास की रनों के लिहाज से सबसे बड़ी जीत है. सरफराज ने पहली पारी में 153 रन बनाए. दूसरी पारी में उन्हें बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला.

Tags: BCCI, Mumbai, Ranji Trophy, Sarfaraz Khan

Source link

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published.